सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

कल्कि अवतार पहले भी हो चुके हैं

श्रीमद् भागवत में भगवान विष्णु के 22 अवतारों का उल्लेख है कलयुग में 21 वा क्रम बुध के अवतार का है तथा 22 वा कल्कि का तथा दूसरी सूची में श्रीमद्भागवत के द्वितीय स्कंध के सातवें अध्याय में 23 विक्रम पर बुध तथा 24 व पर कल्कि का उल्लेख है इसके बाद 12वीं स्कंद के द्वितीय अध्याय में भगवान कल्कि के बारे में कहा गया है कि संभल ग्राम में विष्णु यश श्रेष्ठ ब्राह्मण के पुत्र के रूप में भगवान कल्कि का जन्म होगा वे देवदत्त राम के घोड़े पर अरुण होकर अपनी कराल कलवार से दुष्टों का संहार करेंगे तभी सत युग का प्रारंभ होगा इन तीनों जगहों पर भविष्य काल की क्रियाओं का प्रयोग है किंतु कल्कि पुराण में हर जगह भूतकाल क्रियाओं का प्रयोग है निश्चय ही कल्कि पुराण में वर्णित कल्कि अवतार की कथा किसी पूर्व मन्वंतर की है क्योंकि प्रत्येक कलयुग के अंत में भगवान कल्कि का अवतार होता रहा है एक बार कल्कि का अवतार होता रहा है भविष्य पुराण में और कल की कथा है वर्तमान में श्वेत 12 कल्प चल रहा है जिसका सातवां मन्वंतर वैवस्वत मन्वंतर है और उसके अंतर्गत 28 वा कल युग चल रहा है अतः 27 चतुर योगी इस मन्वंतर की और 6 * 71 = 426 चतुर योगी पिछले 6 मन्वंतर की बीत चुकी है जब श्वेत वाराह कल्प शुरू हुआ भविष्य पुराण की कथाएं उससे भी पहले की है यह कल्कि पुराण भी उसका ही परिशिष्ट है इसलिए कल्कि पुराण की कथा भी पूर्व कल की ही कथा है

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