सोमवार, 18 फ़रवरी 2019

नित्य कर्मों के साथ-साथ प्रभु का ध्यान

क्या वेद क्या पुराण क्या रामायण तथा क्या महाभारत सर्वत्र आदि मध्य और अंत में हरी का ही गुणगान किया गया है अतः हमें सदैव भगवान नारायण का ध्यान करना चाहिए इसके लिए हमें अपने दैनिक कार्यों यह जिम्मेदारियों से बचने की कोई आवश्यकता नहीं है हम दिन भर के प्रत्येक कार्य को करते हुए भी ईश्वर का भजन ध्यान कर सकते हैं जिस प्रकार गोपिया दिन भर के सभी सामान्य कामकाज करते हुए भी मित्र सांवरे सलोने कन्हैया के भजन ध्यान में खोई रहती थी तथा अंततः जिन्होंने श्रीकृष्ण को प्राप्त कर ही लिया था यहां तक की गोपियां तो साधारण थी किंतु उनकी भक्ति को वेद पुराणों में भी असाधारण माना जाता रहा है क्या हम भी नित्य के प्रत्येक कार्य करते हुए हरि भजन ध्यान करने का अभ्यास नहीं कर सकते हैं इसलिए हमें घरवा छोड़ने की तथा तीर्थ स्थान स्नान करने की भी कोई आवश्यकता नहीं है सिर्फ उस सावरे को स्मरण भर करना है और उससे प्रीति इसमें का संबंध बनाना है

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