शनिवार, 16 फ़रवरी 2019

कल्कि जी का स्वरूप

हम सभी हरि भक्तों जितना श्री विष्णु जी के अवतार श्री राम कथा श्री कृष्ण को मानते हैं उतना श्री कल्कि जी को नहीं मानते इसका कारण यह है कि हमें श्री कल्कि जी के बारे में जानकारी ही नहीं है श्री राम और श्री कृष्ण के बारे में लघु कथाएं हम पढ़ते सुनते हैं और श्री कल्कि के बारे में जानकारी हमें उपलब्ध नहीं है क्योंकि कल्कि अवतार तो अभी होना है

kalki ji


उनकी लीलाएं तो अभी होनी बाकी है भगवान श्री कल्कि पीतांबर वस्त्र धारण करने वाले नीलवर्ण सफेद घोड़े पर सवार हाथ में तलवार लिए हुए हैं तथा उनके सिर पर मोर मुकुट शोभा पाता है तथा मुख पर अद्भुत तेज अधरों पर मनमोहक मुस्कान है उनके शरीर का रंग कमाल के पत्तों के समान नीले रंग वाला है सुंदर कमल जैसी आंखें हैं तथा भुजाएं घुटनों तक लंबी है विशाल वक्त तथा पतली कमर है कमलापति भगवान कल्कि श्रीवत्स चिन्हित हृदय वाले तथा कौस्तुभ मणि की कांति से प्रकाशित हैं भक्त जाओ हाथों पर पुकार करते हैं तब करूना वरुणा ले भगवान श्रीहरि ब्यावलो आने के लिए विवश हो जाते हैं इसलिए उन्हें प्रेम पूर्वक पुकारना अति आवश्यक है इसके लिए जरूरी है हम प्रेम से हृदय से अश्रुपूरित नेत्रों से उनकी छवि को निहारते हुए विरह वेदना से व्याकुल होकर उन्हें बार-बार पुकारे कल की कल की जपते रहो जब तक घट में प्राण तभी तो दीना नाथ के भनक पड़ेगी कान और जब तक हमारी आवाज पहुंचेगी बे हमारी पुकार पर यहां आए बिना नहीं रहेंगे किंतु उनके लिए आवश्यक है कि हम सच्चे मन से उन्हें प्रेम पूर्वक पुकारे और उनसे कहें कि हे प्रभु अब तो जीवन बहुत कठिन हो चला है अब तो अवतार अवतार लो

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